पड़ोसियों का दर्द – 5

 

पद्मावती का जीवन एक अजीब खालीपन से भरा हुआ था। उसका पति हर शाम शराब में डूब जाता और रात होते-होते नशे में धुत्त होकर कहीं कोने में गिर जाता। उसके लिए पत्नी का कोई मतलब नहीं थान भावनाओं में, न शरीर में। पद्मावती ने कई बार कोशिश की थी कि वह उसे समझाए, उसे अपने पास खींचे, लेकिन हर बार वही जवाब मिलता: शराब ही उसकी दुनिया थी। धीरे-धीरे उसने यह स्वीकार कर लिया कि उसके पति से उसे कभी सुख नहीं मिलेगा। लेकिन उसका शरीर अब भी ज़िंदा था, उसकी इच्छाएँ अब भी जागती थीं। वह औरत थी, जवान थी, और उसकी भूख को दबाना आसान नहीं था। यही वजह थी कि उसने अपने भीतर एक आदत बना ली थीपुरुषों को लुभाने की। उसे पता था कि उसकी आँखों में एक चमक है, उसकी मुस्कान में एक खिंचाव है, और उसका शरीर अब भी आकर्षक है। उसने तय कर लिया था कि अगर उसका पति उसे नहीं देखता, तो वह खुद अपनी भूख मिटाएगी। अब उसकी नज़र अपने ही घर में टिक गई थीसुमित पर।

सुमित जवान था, मजबूत था, लेकिन भीतर से उलझा हुआ। वह रात को शेवंती के पास जाता था, उसकी राख में गर्माहट खोजने के लिए। सुबह को वह विद्या के पास जाता था, उसकी आग में जलने के लिए। दोनों औरतें उसे अलग-अलग तरह से खींच रही थीं।  विद्या उसकी आग थी, शेवंती उसकी राख। लेकिन पद्मावती जानती थी कि उसके पास तीसरी ताक़त हैभूख। उसने देखा कि सुमित लगातार दो औरतों को संतुष्ट कर रहा है। उसकी चाल, उसकी आँखों की थकान, उसके चेहरे की चमक सब कुछ बता रहे थे कि वह अब बच्चा नहीं रहा। पद्मावती ने यह सब ध्यान से देखा। उसकी आँखों में ईर्ष्या नहीं थी, बल्कि भूख थी। उसे लगता था कि सुमित में वही ताक़त है जो उसे चाहिए।

वह सोचती थी: यह लड़का दो-दो औरतों को संभाल सकता है। उसकी ताक़त, उसकी चाहत, उसकी वासनासब कुछ साफ दिखता है। और मैं? मैं अकेली हूँ। मेरा पति शराब में डूबा है। मुझे कोई नहीं देखता। लेकिन यह लड़का… यह मुझे देख सकता है। यह मुझे दे सकता है जो मुझे चाहिए। धीरे-धीरे उसने सुमित को परखना शुरू किया। जब वह सुबह विद्या के कमरे से लौटता, तो पद्मावती उसे देखती और मुस्कराती। जब वह रात को शेवंती के पास जाता, तो पद्मावती उसकी चाल पर ध्यान देती। कभी वह उसे चाय का कप देती, कभी उसके माथे पर हाथ रखकर पूछतीथक गया होगा? सुमित असहज हो जाता। उसे लगता कि पद्मावती सब जानती है। और सच में, पद्मावती सब देख रही थी।

एक सुबह, जब सुमित विद्या के कमरे से लौट रहा था, पद्मावती ने उसे रोका और कहा, थक गया होगा… दो-दो औरतों को संभालना आसान नहीं होता। सुमित चौंक गया और बोला, आप… क्या कह रही हैं? पद्मावती मुस्कराई, मैं सब देखती हूँ। तेरी आँखें, तेरी चाल, तेरी चुप्पी। तू अब बच्चा नहीं रहा। सुमित चुप रहा तो वह और पास आई, तेरे पास ताक़त है… और मैं अकेली हूँ। तेरा बाप शराब में डूबा है। तू मुझे देखेगा… या मुझे भी अनदेखा करेगा? सुमित ने सिर झुका लिया और कहा, आप मेरी माँ हैं। मैं… मैं ऐसा नहीं कर सकता। पद्मावती हँस पड़ी, माँ? तेरे लिए विद्या कौन है? तेरे लिए शेवंती कौन है? तू सब जानता है, फिर भी जाता है। और अब जब मैं तुझे बुला रही हूँ, तो तू पीछे हट रहा है? सुमित ने धीरे से कहा, मैं आपको सम्मान देता हूँ। मैं… मैं आपके साथ नहीं आ सकता।

पद्मावती की आँखें बदल गईं, अब उनमें भूख के साथ कठोरता भी थी। उसने धीरे से कहा, अगर तू मेरे पास नहीं आया… तो मैं सब बिगाड़ दूँगी। शेवंती के पास जाना बंद करवा दूँगी। विद्या के पास जाना बंद करवा दूँगी। और अलग से तुझे पिटवाऊँगी भी। तेरे बाप को बता दूँगी, तेरे राज खोल दूँगी। सोच ले… तू मुझे अनदेखा करेगा तो मैं तुझे चैन से जीने नहीं दूँगी। सुमित काँप गया, उसे लगा कि पद्मावती सच में सब कर सकती है। अब उसके पास कोई रास्ता नहीं था। वह जानता था कि अगर पद्मावती ने सच में सब बिगाड़ दिया, तो उसका राज खुल जाएगा, शेवंती और विद्या दोनों उससे दूर हो जाएँगी और उसका बाप उसे मार डालेगा।

पद्मावती ने धीरे-धीरे उसे अपने जाल में खींचना शुरू किया। पहले उसकी थकान पर चिंता जताई, फिर उसकी ताक़त की तारीफ़ की, फिर उसके हाथों को हल्के से छुआ और अंत में उसे सीधे अपने कमरे में बुलाया। सुमित असहज था, लेकिन धीरे-धीरे वह पद्मावती के जाल में फँसता गया। पद्मावती ने उसे शब्दों से बाँध लिया, तेरे पास आग और राख है। लेकिन मैं… मैं तेरी भूख हूँ। तू मुझे चाहेगा, क्योंकि मैं तुझे वही दूँगी जो और कोई नहीं दे सकता। सुमित चुप रहा, उसकी आँखों में डर था, लेकिन उसके भीतर चाहत भी जाग रही थी।

एक रात जब उसका बाप शराब में धुत्त होकर गिर गया था, पद्मावती ने दरवाज़ा खुला छोड़ा। सुमित चुपचाप अंदर आया। कमरे में हल्की रोशनी थीबाहर रात गहरी हो चुकी थीसुमित थका हुआ-सा बैठा था, और पद्मावती उसके सामने आकर ठहर गईउसकी आँखों में वही चमक थी, जो अक्सर सुमित को असहज कर देती थीउसने धीरे से पूछा, “सच बताइन दोनों में से कौन तेरे दिल के करीब है? विद्या या शेवंती?”

सुमित ने चौंककर उसकी ओर देखा। कुछ पल चुप रहा, फिर गहरी साँस लेकर बोला, “मैं शेवंती के पास सिर्फ इसलिए जाता हूँ कि वह चुप रहे। अगर मैं उसके पास न जाऊँ, तो वह सबको बता देगी। मुझे उससे कोई लगाव नहीं है। मेरी चाहत… मेरी खिंचाव तो विद्या की तरफ है।”

पद्मावती ने उसकी आँखों में झाँका। उसके चेहरे पर हल्की मुस्कान फैल गई। उसने कहा, “तो शेवंती तेरे लिए सिर्फ बोझ है… और विद्या तेरी चाहत। लेकिन तूने कभी सोचा है कि विद्या तेरी राख है। उसमें गर्माहट है, पर आग नहीं। और मैं… मैं तेरी भूख हूँ।”

सुमित असहज होकर उठने ही वाला था कि पद्मावती ने अचानक अपनी साड़ी का पल्लू थोड़ा सरकने दिया। उसका कंधा और गले का हिस्सा खुल गया। उसने ऐसे जताया जैसे यह सब अनजाने में हुआ हो। “ओह… ढीली हो गई,” उसने कहा, लेकिन उसकी आँखें सुमित पर टिकी थीं।

सुमित ने नज़रें फेर लीं, लेकिन उसके भीतर हलचल थी। पद्मावती ने पास आकर धीमे स्वर में कहा, “देख… मैं कुछ छुपा नहीं रही। तू चाहे तो मुझे अनदेखा कर सकता है। लेकिन अगर तू मुझे देखेगा… तो समझेगा कि मैं तुझे वही दे सकती हूँ जो विद्या और शेवंती कभी नहीं दे पाएँगी।”

सुमित ने काँपते हुए कहा, “आप… ये सब क्यों कर रही हैं?”

पद्मावती ने उसकी ओर झुककर कहा, “क्योंकि मैं भूखी हूँ। और तू ही है जो मेरी भूख मिटा सकता है। तू विद्या की तरफ खिंचता है, शेवंती से डरता है… लेकिन मेरे सामने तू खुद को रोक नहीं पाएगा।”

कमरे में सन्नाटा था। बाहर हवा बह रही थी। पद्मावती ने साड़ी का पल्लू ठीक करने का नाटक किया, लेकिन उसकी हरकतें साफ थींवह सुमित को लुभा रही थी। सुमित की साँसें तेज़ हो गईं। उसके भीतर डर और चाहत दोनों एक साथ जाग रहे थे।

पद्मावती ने अचानक अपने सोये हुए पति का लंड चड्डी से बहार निकला और होनी २ उंगलियों में पकड़ के सुमित को दिखने लग गयी , “देख तेरे बाप का कैसा छोटा सा है, न ठीक से तनता है न अंदर जाता है।”

ये देख के सुमित सकपका गया, उसने ज़रा भी नहीं सोचा था के उसकी माँ ऐसा कुछ करेगी , ” तेरा दिखा, कैसा है? दो दो औरतोंको खुश कर रहा है, मुझे भी दिखा कैसा है। ” पद्मावती की खरकते देख सुमित का लंड खड़ा हो गया था लेकिन वह फिर भी डर रहा था, चुप चाप खड़ा थापद्मावती अपने पति का छुआरा चूसने लग गयी

आज तो वह सुमित का पूरा डर ख़तम कर के उसको ऐसे खोलने वाली थी जैसे सुमित और वह जब चाहे जहा चाहे बिना झिझक चुदाई कर पाए। “दिखा रे , क्यों शर्मा रहा है।” सुमित के आगे का हिस्सा उठा हुआ दिख रहा था, पद्मावती जान गयी थी के उसका काम लगबग हो गया है। ” दिखा जल्दी, और कितना तड़पाएगा मुझेअब इस से काम नहीं चलता मेरा।”

अपने पति का छोटा सा लंड छोड़ के वह उठ गयीजा कर सुमित के सामने घुटनो पे बैठ गयी। “मैंने कहा था ना, मैं भूक हु, चल जल्दी से मेरी भूक मिटा दे। ” वह चाहती थी के सुमित भी पूरी तरह खुल जाए

सुमित को अपनी माँ की साँसे अपने लोडे पे महसूस हो रही थीउसको भी मन कर रहा था की अपना लंड निकाल के पद्मावती के हलक तक ठूस दे लेकिन सामने बाप सोया थाउसकी हिम्मत नहीं हो ही नहीं रही थी

वह पीछे हट के बालकोनी में चला गया। “मुझे कुछ समझ नहींरहा।” उसने बालकोनी से कहापद्मावती घुटने और हाथ के बल बिल्ली की तरह अपना शरीर लचकते हुए अपने छोटे स्तन झुलाते हुए सुमित की तरफ बढ़ रही थीये नज़ारा देख के सुमित का लोढ़ा झटके मारने लग गयाजैसे ही पद्मावती ने वह हरकत देखि, वह अपनी जगह पे रुक गयीचल निकाल, दिखा मुझे।”

सुमित जहा खड़ा था वह से उसको उसका बाप दिखाई नहीं दे रहा थाउसने हिम्मत जुटा के अपना लंड बहार निकालाउसका लंड तो टैक्सी ड्राइवर से भी बड़ा दिख रहा थापद्मावती की आँखे मदहोश होने लगीसुमित ने माँ की आँखों में नशा चढ़ते देखा और लोडा हिला के माँ को पास आने का इशारा किया

पद्मावती भूके जानवर की तरह लपकी और अपने बेटे का केला मुँह में लेने लग गयीसुमित भी बोहोत देर से इस ही पल की कल्पना कर रहा थाउसने पद्मावती के दोनों कान पकडे और ठूस दिया अपना लंड उसके मुँह मेंपद्मावती इस अचानक हुए हमले के लिए तैयार नहीं थीउसको ठसका लग गया और जोर से खांसने लग गयी

सुमित ने उसको छोड़ा नहीं, उसने अपना लंड अपनी माँ के गले तक उतार दिया और वैसे ही रुक गयापद्मावती की साँसे अटक गयीवह सोच रही थी अब मर जाएगी तब सुमित ने कहानाक से सांस लो माँसुनते ही पद्मावती ने नाक से लम्बी सांस भरी और उसकको कुछ रहत मिलीथोड़ी देर नाक से साँसे लेने के बाद पद्मावती ने फिर अपनी नशीली आँखों से सुमित की और देखाउसकी आँखों और नाक दोनों बह रही थीसुमित को नज़ारा किसी अंग्रेजी ब्लू फिल्म से कम नहीं लग रहा था

वह अपना लंड आगे पीछे करने लगा गयापद्मावती भी कहा हार मानने वाली थीउसने भी खुद को सँभालते हुए सुमित के लोडे को जन्नत का मज़्ज़ा देने लग गयीसुमित आँखे बंद कर के पूरे जोश में अपनी मम्मी का गला चोद रह था और पद्मावती भी हफ्ते , गुर्राते हए अपने बेटे का लंड अंदर और अंदर तक लेने लग गयी

सुमित का पानी छूटने वाला थाउसने माँ के सर के पीछे हाथ दाल के अपना लंड अंदर दबा दिया और झड़ने लग गयापद्मावती को अपने बेटेका झटकता हुआ लंड अपने हलक में महसूस हो रहा था

उसके मन एक एक जीत का और एक शान्ति का एहसास थाउसका भी अब घर में ही बढ़िया जुगाड़ हो गया थाजब चाहे जैसे चाहे इस्तेमाल करने के लिए एक मजबूत जिस्म मिल गया था

अब सुमित तीन औरतों के बीच फँस चुका था, विद्या उसकी आग थी, शेवंती उसकी राख, और पद्मावती उसकी भूख। हर औरत उसे अलग तरह से खींच रही थी और सुमित धीरे-धीरे अपनी पहचान खो रहा था।

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