प्यासी मामी

दोस्तों, मैं “रवि” अपनी पहली बार कहानी लेके आया हु. और समझता हु आपको यह अच्छी लगे, यह कहानी मेरी अपनी सगी मामी पर आधार है. मेरी मामी का नाम कौशल्या है. उनकी उम्र 36, और कद 5.5″ इंच है. पूरी की पूरी भरी हुई है. उनकी चुची एकदम गोल और कड़क है, अगर हाथ से पकड़ना भी चाहो तो भी आसानी से नहीं पकड़ सकते, kariban 38″ साइज होगा. रंग गोरा और चूतड़ तो कलिंगड़ की तरह मस्त है. शादी शुदा होने के साथ साथ एक बच्चे की माँ है. उनका लड़का राजू 18 साल का जो स्कूल में पड़ता है. आवारा लड़को के साथ रहकर बोहोत बिगड़ चूका था.

कौशल्या का पति एक घरेलू पति है. जो एक बैंक केशियर है, मेरी उम्र 21 साल. मैं अपनी मामी के घर से कुछ दूर ही रहता हु. मेरे माता-पिता मेरे साथ ही रहते ह. दोनों स्कूल टीचर है और एक्स्ट्रा इनकम के लिए प्राइवेट कोचिंग भी देते है. मई अपनी पढ़ाई पूरी कर चूका था और नौकरी की तलाश में कभी कभी इधर-उधर इंटरव्यू देता रहता था. मैंने अपने मामा से भी नौकरी की सिफारिश की थी, पर अभी तक कुछ नहीं कर पाए.

1 दिन मुझे मामा का फ़ोन आया और उन्होंने मुझे अपने घर बुलाया, संडे का वक़्त था, मैं उनके घर पंहुचा. वह कुछ नौकरी के सिलसिले में बात करनी थी. राजू टूशन पड़ने गया था. मामी चाय बनाने के लिए किचन में थी. मैं मामा के सामने बैठा बात कर रहा था, की तभी मामी चाय लेकर आई, उन्होंने लाल कलर की साडी पहनी थी जिसका ब्लाउज हमेशा की तरह कुछ ज़्यादा ही टाइट था. मैंने मामी को कई बार ऐसे नज़रों से देखा था, पर कभी उनसे हिम्मत करके सेक्सी बातें नहीं की, क्यूंकि मेरे मामा बोहोत ही कड़क मिज़ाज़ का था.

मामा को अचानक उनके सेल फ़ोन पर फ़ोन आया जिसके वजह से वह उठ कर बालकनी में बात करने चले गए, इधर कौशल्या मामी मुझे चाय देने के लिए मेरे सामने थोड़ी झुकी, जिसके वजह से उनका पल्लू थोड़ा सरक गया. अब उनकी चुकी इतनी भारी थी की वह ब्लाउज से बहार आने को तड़प रहे थे. पर हाथ में ट्रे होने की वजह से मामी साडी नहीं सम्भल पायी, उनकी दोनों भारी चुची मेरी आँखों के सामने बोहोत चमक रही थी, और चुची की बीच की रेखा बोहोत लम्बी और गहरी थी. ऐसा लग रहा था जैसे साली की दोनों चुची को पकड़ कर किसी कोने में जा कर मसल दो और उसके पति को भी न समझे. मामी ने मुझे चाय देकर जल्दी से अपना पल्लू संभाला. मामी मेरे सामने वाली सीट पर बैठ गयी और मुझसे बातें करने लगी…

मामी: “कैसे हो रवि, बोहोत दिनों बाद आये, माँ और पिताजी नहीं आये”?

रवि: “मैं ठीक हु, माँ और पिताजी मंदिर गए है, और दोपहर को भगवान् का प्रसाद खा कर ही घर लौटेंगे. वह तो मामाजी ने मुझे नौकरी के सीसलसिले में बुलाया था तो यहाँ आ गया, सोचा आप से भी मुलाकात हो जाएगी.” नौकरी के चक्कर में किसी से मिलने का टाइम ही नहीं मिलता”.

मामी: “ओह्ह!!! तो रवि अब काफी बड़े हो गए हो और अपने घर के प्रति बोहोत सोचते हो, अच्छा है तुम्हारी शादी भी कुछ सालो में हो जाएगी.”अच्छा,, आज दोपहर का खाना तुम हमारे साथ ही खा लेना.”

रवि : ” ओके मामीजी!! मैं यही मामा से बात करके रुक जाऊँगा और खाना खा कर ही निकलूंगा”(मैं मैं ही मैं खुश हो गया और सोचने लगा की आज मामी को जी भर के देखूंगा और मज़ा लूँगा).

मामी: ” तब तो ठीक है, बात करके किचन में आ जाना, मेरा भी टाइमपास हो जायेगा. तुम्हारे मामा तो फ़ोन से फुरसत ही नहीं मिलती

और मामी ने हलकी सी स्माइल देकर फिर सोफे से उठने लगी. पर उठते वक़्त फिर से उनका पल्लू ज़रा सा सरक गया जिसके वजह से फिर एक बार मुझे उनके बड़े बड़े मुम्मे बहार झूलते हुए दिखाई पड़े. मामी मेरी नज़र को देखती हुई स्माइल दी और चली गयी.

थोड़ी ही देर बाद मामाजी आये और मेरे साथ बात करने लगे

मामा: ” रवि, कल 8 बजे सुबह सुबह तुमको मेरे साथ ट्रैन पकड़नी पड़ेगी”. मेरे ऑफिस के पीछे एक नया इम्पोर्ट और एक्सपोर्ट का बिज़नेस ऑफिस खुल गया है जिसमे उन्हें एक अकाउंटेंट की जरूरत है, हो सकता है तुम्हारे लिए वह अच्छी नौकरी साबित हो”. कल मुझे तुम वह सेलेक्ट हुए बिना वापस घर नहीं आओगे. मैं नहीं चाहता तुम भी मेरे लड़के की तरह आवारा बनो..”

रवि: ” जी मामाजी, में जर्रोर कोशिश करूंगा.(मामा की बात सुनकर मैं हर वक़्त पानी पानी हो जाता था. और शायद इसी लिए मैं मामी पर बुरी नज़र डालने के लिए भी हज़ार बार सोचता रहता था).

मामाजी इतना बोलकर किचन में गए और मैं वही टीवी देखते-देखते मामीजी ने दिया हुआ पोहा खाने लगा. मेरा नाश्ता का पहला निवाला कहते ही मुझे प्यास लगी कुयूंकि में शायद मिर्ची खा गया था, मैं पानी लेने के लिए किचन के अंदर जल्दी से भागा. जैसे ही मेरा पहला पेअर किचन में पड़नेवाला था की मेरे कानो में मामी की आवाज़ पड़ी.

मामी: “उफ़ माँ ”, हटजी!!, क्या कर रहे हो. खाना बनाने दो, रवि ने देख लिया तो आफत हो जाये गई.”

मैं एक सेकंड मैं समझ गया की मामा किचन मैं मामी के साथ क्या कर रहे थे. मैं वही खड़ा रहकर चुपके से देखने लगा. पर मेरी गांड भी फट रही थी क्यूंकि मामा भी वही था. मैं हिम्मत जूता के वही खड़े रहना उचित समझा, मेरा 9″ इंच का लावड़ा जो तन चूका था. मैं जान गया था मामा, मामी को कुछ कर रहे है. मैंने देखा मामाजी मेरी मामी के पीछे खड़े थे, उन्होंने पीछे से हाथ दाल कर पल्लू नीचे गिरा दिया, और

जैसे हर कोई आदमी या लड़का किसी औरत की चुकी पहली बार ज़ोर ज़ोर से दबाता और मसलता है. ठीक उसी तरह मेरे मामाजी, मामी का पल्लू हटाकर ज़ोर ज़ोर से दोनों हाथो से ब्लाउज के ऊपर ही ऊपर बे-रेहमी से मसलते चले जा रहे थे.

मामा: “कौशल्या रानी मेरी जान!!, डरो मत, रवि तो तुम्हारा दिया हुआ नाश्ता अभी शुरू ही किया है. उसे वक़्त लगेगा. तब तक मैं तुम्हारी सेवा कर देता हु.” इसपर मामी जो कुकर मैं शायद चावल साफ़ कर रही थी, सिसकारी लेकर कहने लगी,

मामी: “अह्ह्ह्ह!! जाओ जी कल रात को ही तो तुमने मेरी ली थी देखो तुम मुझे काम करने दो..”

मैं पहली बार मामा और मेरी ममी को ऐसे हालत मैं देखा था, मैं अपना लावड़ा पकडे खड़ा का खड़ा रह गया. पर मुझे क्या पता था की पिक्चर का असली मज़ा आगे बाकी है. मामा फटाफट मेरी मामी की चुकी ज़ोर ज़ोर से दबाते दबाते बोले (थोड़ी हलकी आवाज़ मैं)

मामा: “कौशल्या रानी, रात गयी बात गयी, अब ज़रासा यह बताओ यह “ली थी” का मतलब क्या है जानेमन”. “ज़रा खुल के बताओ न”.

सुनते ही इसपर मामी शर्मा गयी और सिसकारी लेते बोली

मामी: “उफ्फफ्फ्फ़!!! जाओ, जी मेरे मुँह से तुम एहि सब बात बुलवाते हो. तुम्हे बड़ा मज़ा आता है गन्दी गन्दी बाते सुन्ना मेरे मुँह से.”

मामाजी टपक से बोले

मामा: “है रानी तुम जितनी हसीं और कातिलाना दिखती हो, उससे ज़्यादा तुम्हारा यह बदन है. जो इतना भरा भरा और गदराया है की आदमी क्या कोई जौवन लड़का भी तुम्हारे ऊपर चढ़ के रगड़ रगड़ कर तुम्हारी चुदाई करेने का सपना देखता होगा”

मैं तो खुशनसीब हु की मैं तुम्हारा पति हु और तुम्हारी चुदाई का अधिकार सिर्फ मुझे ही है. अच्छा बोलै न रानी, तुम वह “कल रात ली थी” का मतलब क्या है?”

इसपर मामी बोली,

मामी:”उफ्फ्फ!!, हीीीिस्सस, बोलती हु, बोलती हु, मुझे भी पता है , अह्हह्ह्ह्ह !!! मेरे जैसा गदराया हुआ भरा बदन नसीब वालो को मिलता है. इसलिए तो हर शनिवार और रविवार को मैं तुम्हारेलिए ही टाइट ब्लाउज पहनती हु. हर शनिवार की रात मुझपर चढ़ कर मेरी जी भर के चुदाई करते हो, कल रात को भी तुमने मेरी ऐसी चुदाई की सुहागरात का दिन याद आ गया था.”..उफ्फ्फ्फ़!!!”.

इतना सुनकर मां खुश हो गए और ब्लाउज के बटन खोलने लगे, शायद मामा का लैंड बुरी तरह कड़क हो चूका था,, मैं यह सब देख सुन कर और मानो पेअर से ज़मीन खिसक गयी, मैंने अपनी मामी और मामा के बारे में कभी ऐसा नहीं सोचा था की सेक्स करते वक़्त यह लोग गली जैसे शब्दों का उपयोग करेंगे. पर जब मैंने सूना तो मुझे भी उनकी बातें सेक्सी लगी, मैं कौशल्या मामी के प्रति और ज़्यादा दीवाना बन गया था. मैं वही मुठ मरना शुरू कर दिया,

सोचा अब मामा किचन में ही मामी की चुदाई शुरू करेंगे, पर जैसे ही मामा ने टाइट ब्लाउज का पहला बटन मुश्किल से खोला, मामी ने मामाजी को पीछे धक्का दिया और कहने लगी” सुनोजी, मुझे अभी काम करने दो, रवि कभी भी उठ कर किचन में आ सकता है, तुम्हारा बिस्तर में रात को सोते वक़्त गरम कर दूँगी. तब जैसे चाहे वैसे कर लेना.” मैं मामी की यह बात सुनकर मेरा लंड को तो रहा ही नहीं गया, और दो हलके धक्के के साथ मेरे लंड का वीर्य अंडरवियर मैं बुरी तरह फहैल गया.

मामा जाते जाते मामी की एक चुकी का निप्पल ज़ोर से मसल दिया और किचन से बहार आने लगे “ठीक है जानेमन, रात को तुम्हारी जमकर लूँगा”. मैंने जैसे ही मामा को किचन से बहार आते देखा, मेरी तो गांड ही फट गयी, मैं फटाक से वापस टीवी देखकर नाश्ता करने लगा, जैसे मैंने कुछ देखा ही न हो. मामा मेरे पास आ कर बैठे और कहा,,”अरे अब्भी तक तुमने नाश्ता ख़तम नहीं किया, तुम्हारी मामी तो खाना भी बनाना शुरू कर दिया.” मैंने कहा, “अरे नहीं मामाजी, मैं TV देखते देखते भूल ही गया. अच्छा मामा मैं घर जाकर आओ मैं अपना मोबाइल घर पर ही भूल आया हु. (मुझे मजबूरन झूट बोलना पड़ा ताकि मैं घर से अपना अंडरवियर चेंज कर सकू). मामा बोले “ठीक है पर जल्दी वापस आना मैं भी थोड़ी देर के लिए अपने मित्र के घर जा रहा हु, दोपहर को तुम, मैं, तुम्हारी मामी और राजू (मामी का लड़का) साथ मैं खाना खाएंगे. तब तक तुम मामी से बात करो, ताकि उसका भी वक़्त गुज़र जाए.” मैं फटाक से घर जा कर अंडरवियर बदल लिया और वापस कौशल्या मामी के घर पोहोच गया.

मैं जनता था मामा को वापस आने में वक़्त लगेगा, इसलिए मैं उसका पूरा फायदा उठाना चाहता था. मैंने अपनी आधी खायी हुई नाश्ते की प्लेट उठाकर रसोई में चला गया जहा मामी खाना बना रही थी. मैं बोहोत खुश था और मन ही मन काफी बातें सोच राखी थी. मैं किचन मैं जैसे ही पोहचा मामी ने मुझे देखकर मुस्कुराकर पूछने लगी

मामी: “ अरे !!!!, तुम इतने जल्दी आ गए, और यह नाश्ता आधा क्यों छोड़ दिया?. अच्छा नहीं लगा क्या?”

रवि: “अरे नहीं मामीजी, मैं तो घर से ही खा कर निकला था, फिर भी तुम्हारे हाथो से बना था इसलिए मन नहीं कर सका.” आप बोहोत अच्छा खाना बनती है…

मामी: “सच…!!!? मेरे बेटे राजू को तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता मेरे हाथ का, न जाने बहार क्या खाता पीटा है, तुम जैसा समझदार लड़का हर औरत को नसीब नहीं होता.”

मामीजी की बातें सुनकर ऐसा लगा जैसे मामी दो तरफा बात कर रही है….

रवि: “अरे मामीजी, दुखी मत हो, सब ठीक हो जायेगा, मैं तुम्हारे हर प्रॉब्लम को सोल्वे कर दूंगा, पर पहले मैं आपके साथ खाना बनाने में मद्दद करूंगा. चलो!!!, मुझे आप तरकारी दो मैं उन्हें काट देता हु….तब तक आप दूसरा काम कीजिये.”

मामी: “ अरे!!! नहीं रहने दे, मैं सब कर लूंगी, तू बस इधर बैठकर बातें कर और मुझे देखते जा, की कैसे तेरी यह मामी फटाफट काम ख़तम करती है.”

मामी की बात सुनकर मेरे तो मैं मैं लाडू फूटने लग गए, ऐसा ल

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